+91 9414075333 श्री वीर तेजा मंदिर, भगत की कोटी जोधपुर

सदस्यों का वर्गीकरण एवं शुल्क

साधारण सदस्य वहीं होंगे जो संस्थान के सदस्यता ग्रहण करते समय 1100/- रूपये शुल्क जमा करवायेंगे। परन्तु उनका कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक नहीं होगा एवं मतदान का अधिकार एकबार कार्यकारिणी के गठन तक सिमित होगा। सदस्यता नवीनीकरण कराने के लिये सदस्य को उस समय लागू साधारण सदस्यता शुल्क देना होगा।

संरक्षक सदस्य

5 लाख या अधिक.

आजीवन सदस्य

11,000/-

साधारण सदस्य

1100/-

मारवाड़ जाट महासभा संस्थान विधान (नियमावली)

संस्था का नाम

इस संस्था का नाम ’’मारवाड़ जाट महासभा संस्थान’’ है व रहेगा।

पंजीकृत कार्यालय तथा कार्य क्षेत्र

इस संस्थान का पंजीकृत कार्यालय द्वारा डाॅ गंगाराम जाखड़ पुत्र स्व. श्री हिम्मताराम अध्यक्ष, वीरतेजा मंदिर, भगत की कोठी, जोधपुर एवं इसका कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राजस्थान राज्य होगा।

सदस्यता

निम्न योग्यता रखने वाले समाज के व्यक्ति संस्थान के सदस्य बन सकेंगे।
1. संस्थान के कार्य क्षेत्र में निवास करता हो।
2. बालिग यानी 21 वर्ष की उम्र प्राप्त करली हो।
3. पागल व दिवालिया न हो।
4. भारत का नागरिक हो।
5. संस्थान के हितों को सर्वोपरी समझता हो।
6. किसी भी आपराधिक न्यायालय से दण्डित न हो चुका हो।

सदस्यों का वर्गीकरण एवं शुल्क

संस्थान के सदस्य निम्न प्रकार वर्गीकृत होंगे।
1. संरक्षक सदस्य - 5 लाख या अधिक
2. आजीवन सदस्य - 11,000/-
3. साधारण सदस्य - 1100/-
साधारण सदस्य वहीं होंगे जो संस्थान के सदस्यता ग्रहण करते समय 1100/- रूपये शुल्क जमा करवायेंगे। परन्तु उनका कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक नहीं होगा एवं मतदान का अधिकार एकबार कार्यकारिणी के गठन तक सिमित होगा। सदस्यता नवीनीकरण कराने के लिये सदस्य को उस समय लागू साधारण सदस्यता शुल्क देना होगा।

सदस्यता से निष्कासन

संस्थान के किसी सदस्य की सदस्यता समापन/निष्कासन प्रक्रिया निम्न होगी -
1. मृत्यु होने पर
2. त्याग पत्र देने पर
3. संस्थान के उद्धेश्यों के विपरीत कार्य करने पर
4. समय पर सदस्यता शुल्क जमा नहीं करवाने पर
5. उपरोक्त परिस्थितियों में सचिव की अनुशंषा पर निष्कासन का अधिकार अध्यक्ष को होगा।
उक्त प्रकार के निष्कासन की अपील 15 दिन के अन्दर अन्दर लिखित में आवेदन करने पर कार्यकारिणी के निर्णय हेतु बैठक आयोजित की जायेगी। जिसमें बहुमत से लिया गया निर्णय अंतिम होगा।

साधारण सभा

संस्थान के नियम संख्या 5 में वर्णित समस्त प्रकार के सदस्य मिलकर साधारण सभा का निर्माण करेंगे।

साधारण सभा के अधिकार व कर्तव्य

साधारण सभा संस्थान की सर्वोतम सभा होगी एवं संस्थान के सम्पूर्ण अधिकार इसमें निहित होंगे। साधारण सभा के अधिकार एवं कर्तव्य निम्न होगे-
1. कार्यकारिणी का चुनाव करना
2. वार्षिक बजट पारित एवं आय-व्यय का अनुमोदन करना
3. कार्यकारिणी द्वारा किये गये कार्यो की समिक्षा करना व पुष्टि करना।
4. संस्थान के कुल सदस्यों के 2/3 बहुमत से विधान में संशोधन, परिवर्तन अथवा परिवर्धन करना। (जो रजिस्ट्रार के कार्यालय में फाइल कराया जाकर प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने पर लागू होगा।)
5. संस्थान की सम्पति आदि की सुरक्षा/प्रबन्धन की समिक्षा करना एवं आवश्यकतानुसर निर्देश जारी करना।
6. समय समय पर कार्यकारिणी को आवश्यक दिशा निर्देश देना।

साधारण सभा की बैठकें

1. साधारण सभा की बैठक वर्ष में एक बार अनिवार्य रूप से होगी लेकिन आवश्यकता पड़ने पर विशेष बैठक अध्यक्ष की सहमति से सचिव द्वारा कभी भी बुलाई जा सकेगी।
2. साधारण सभा की बैठक का कार्य संस्थान के सदस्यों की कुल संख्या का 1/4 अथवा 100 जो भी कम हो सदस्यों की उपस्थिति में भी सम्पन्न किया जा सकेगा और यदि बैठक के निश्चित समय से आधे घण्टे तक सदस्यों की उपरोक्त गणपूर्ति नहीं होती है तो बिना कुछ किये साधारण सभा विसर्जित कर दी जावेगी।
    परन्तु इस प्रकार विसर्जित होने के बाद बुलाई जाने वाली बैठक की सूचना में यदि यह विशेषतः सूचित कर दिया गया हो कि गत बैठक में सदस्यों की गणपूर्ती न होने के कारण सभा विसर्जित कर दी गई तो उस बैठक के बाद वाली बैठक में गत बैठक के विचारणीय विषय पर निर्णय करने के लिए सदस्यों की गणपूर्ती होने का प्रावधान लागू नहीं होगा।
3. बैठक की सूचना 15 दिन पूर्व व अत्यावश्यक बैठक की सूचना 3 दिन पूर्व दी जायेगी।
4. साधारण सभा के 1/3 अथवा 100 सदस्य इनमें से जो भी कम हो के लिखित आवेदन करने पर अध्यक्ष/सचिव द्वारा 1 माह के अन्दर अन्दर बैठक आहूत करना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि में अध्यक्ष/सचिव द्वारा बैठक न बुलाये जाने पर उक्त 100 सदस्यों में से कोई भी 3 सदस्य बैठक की तिथि, समय, स्थान एवं विचारणिय बिन्दू का नोटिस जारी कर सकेंगे तथा इस प्रकार की बैठक में होने वाले निर्णय वैधानिक व सर्वमान्य होंगे।

कार्यकारिणी का गठन

संस्थान के कार्य को सुचारू रूप से संचालित के लिए एक कार्यकारिणी का गठन किया जायेगा, जिसके पदाधिकारी व सदस्य निम्न प्रकार के होंगे -
1. अध्यक्ष - एक
2. वरिष्ठ उपाध्यक्ष - एक
3. उपाध्यक्ष - एक
4. सचिव - एक
5. अतिरिक्त सचिव - एक
6. कोषाध्यक्ष - एक
7. संगठन मंत्री - एक
8. सदस्य - चार
इस प्रकार प्रबन्धकारिणी में सात पदाधिकारी व चार सदस्य कुल 11 निर्वाचित सदस्य होंगे।
8. निवृतमान अध्यक्ष एवं सचिव अगले कार्यकाल के लिये पदेन सदस्य होंगे।
9. सहवृत सदस्य - कार्यकारिणी द्वारा प्रथम बैठक में 10 सदस्यों का सहवरण किया जायेगा जिनमें मुख्य रूप से समाज के खेड़ों/न्याति नोहरो/पट्टियां/संस्थाओं के अध्यक्ष /जिलाप्रतिनिधि /दो महिला सदस्य होंगे।
10. अध्यक्ष को आवश्यकतानुसार चार अन्य सदस्यों को कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाने का अधिकार होगा। सभी संरक्षक कार्यकारिणी के स्थाई सदस्य होंगे परन्तु मताधिकर नहीं होगा।

कार्यकारिणी का गठन/निर्वाचन

1. संस्थान की कार्यकारिणी का चुनाव तीन वर्ष की अवधि के लिए साधारण सभा के सदस्यों द्वारा किया जायेगा।
2. चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली द्वारा किया जायेगा।
3. चुनाव अधिकारी की नियुक्ति कार्यकारिणी द्वारा की जायेगी।
4. कार्यकारिणी के अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष पद पर लगातार दो कार्यकाल से अधिक बार चुनाव के लिए योग्य नहीं होंगे ।

कार्यकारिणी के अधिकार और कर्तव्य

संस्थान की कार्यकारिणी के अधिकार व कर्तव्य निम्नलिखित होंगे -
1. सदस्य बनाना/निष्कासित करना ।
2. वार्षिक बजट एवं वार्षिक लेखा तैयार करना व साधारण सभा से अनुमोदन करवाना एवं उसके अनुसार कार्य करवाना ।
3. वार्षिक बजट समय पर साधारण सभा से पारित न होने की स्थिति में आवश्यक व्यय हेतु अन्तरिम राशि कार्यकारणी स्वीकृत कर सकेगी परन्तु साधारण सभा से छः माह से पूर्व अनुमोदन आवश्यक होगा ।
4. संस्था की सम्पति की सुरक्षा एवं प्रबन्धन करना ।
5. वैतनिक/अवैतनिक कर्मचारियों की नियुक्ति करना तथा उनके आवश्यकतानुसार वेतन भतो का निर्धारण करना एवं सेवा मुक्त करना ।
6. साधारण सभा द्वारा पारित निर्णयों को क्रियान्वित करना ।
7. कार्य व्यवस्था हेतु समितियां/उप समितियां का गठन करना।
8. संस्थान के लक्ष्यों और उद्धेश्यों को प्राप्त करने के लिए दान, अनुदान, उपहार भेंट और चल और/या अचल सम्पŸिायों के रूप में अन्य सहायता स्वीकार करना।
9. उक्त संस्था की सम्पूर्ण सम्पŸिा या भवन या उसके किसी भाग को खड़ा करना, निर्माण करना, परिवर्तित करना, रख रखाव करना, पट्टे पर देना, बन्धक रखना, सुधार करना/विकसित करना, उसका प्रबन्धन या नियंत्रण करना जो कि संस्थान के लक्ष्यों और उद्धेश्यों को पूरा करने के प्रयोजनार्थ आवश्यक और सुविधाजनक प्रतीत हो।
10. संस्था के लक्ष्यों और उद्धेश्यों के उत्थान और पूर्ति के लिए संस्थान के नाम से भूमि और/या भवन क्रय करना/लीज या किराये पर लेना व अर्जित करना।
11. ऐसे अन्य समस्त कार्य या क्रियाकलाप करना जो आधुनिकम परिस्थितियों में आवश्यक हो और संस्थान के उद्धेश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक और सहायक हों।
12. संस्थान की सम्पूर्ण आय, अर्जन, चल या अचल सम्पŸिायां केवल सोसाईटी के विधान में दिये गये लक्ष्यों और उदेश्यों की प्राप्ति में प्रयुक्त की जायेंगी और उपभोग में ली जायेगी। किसी भी अर्जित लाभ का सोसाईटी के वर्तमान या भूतपूर्व सदस्यों या किसी एक या एकाधिक वर्तमान या भूतपूर्व सदस्यों के माध्यम से मांग करने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभांश, बोनस, लाभ या किसी भी रीति से भुगतान नहीं किया जायेगा।
   रणनीति - उपरोक्त उद्धेश्यों की प्राप्ति हेतु समय समय पर बैठकें आयोजित/आहूत करना, सम्मेलन, विचार गोष्ठी रखना, प्रदर्शनी तथा प्रतियोगिताओं का आयोजन करना तथा स्वेच्छिक वित्तीय सहायता प्राप्त करना। 13. संरक्षक/आजीवन एवं साधारण सदस्यों की सदस्यता की विधानानुसार जांच एवं निर्णय करना।
14. अन्य कार्य जो संस्था के हितार्थ हो, करना ।
15. वित्तीय प्रबंधन करना - बैंक खातों का प्रबन्धन एवं आवश्यकता होने पर बैंक से ऋण लेना एवं लेखो का निर्धारण करना।
16. नियम 11 के उपनियम 9 के अनुसार आवश्यक सदस्यों का कार्यकारिणी हेतु मनोनयन करना।

कार्यकारिणी की बैठकें

1. कार्यकारिणी की वर्ष में कम से कम पांच बैठके अनिवार्य होगी। लेकिन आवश्यकता होने पर बैठक अध्यक्ष के सहमति से कभी भी बुलाई जा सकेगी।
2. बैठक का कोरम कार्यकारिणी की कुल सदस्यों का 1/2 या नौ सदस्य जो भी कम होगा माना जायेगा।
3. बैठक की सूचना प्रायः 7 दिन पूर्व दी जावेगी परन्तु विशेष बैठक की सूचना परिचालन से कम समय में भी दी जा सकती है।
4. कोरम के अभाव में बैठक स्थगित की जा सकेगी जो पुनः दूसरे दिन निर्धारित स्थान व समय पर होगी। ऐसी स्थगित बैठक में कोरम पांच का अवश्यक होगा। लेकिन विचारणीय विषय वहीं होगे जो पूर्व एजेण्डा में थे। ऐसी स्थगित बैठक में उपस्थित सदस्यों के अतिरिक्त कार्यकारिणी के कम से कम दो पदाधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इस सभा की कार्यवाही की पुष्टि आगामी आम सभा में कराना आवश्यक होगा।
5. कार्यकारिणी के निर्णय बहुमत से होगे। अध्यक्ष को किसी प्रस्ताव पर मत विभाजन में समान मत आने पर निर्णायक मत देने का अधिकार होगा।

कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के अधिकार व कर्तव्य

संस्थान की कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के अधिकार व कर्तव्य निम्न प्रकार होगे -
अध्यक्ष
1. बैठको की अध्यक्षता करना ।
2. मत बराबर आने पर निर्णायक मत देना ।
3. बैठक आहूत करना ।
4. संस्था का प्रतिनिधित्व करना ।
5. संविदा तथा अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना ।
6. बजट के अतिरिक्त 1 लाख तक व्यय करने का अधिकार होगा। बाद में ऐसे व्यय को कार्यकारिणी द्वारा संपुष्टि करना आवश्यक होगा।
7. कर्मचारियों की नियुक्ति सचिव की सलाह से करना।
वरिष्ट उपाध्यक्ष
1. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष के समस्त अधिकारों का प्रयोग करना।
2. कार्यकारिणी द्वारा प्रदान अन्य अधिकारों का उपयोग करना।
प्प्प् उपाध्यक्ष
1. अध्यक्ष एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष दोनो की अनुपस्थिति में उनके समस्त अधिकारों का उपयोग करना।
सचिव
1. अध्यक्ष की आज्ञा से बैठकें आहूत करना ।
2. बैठकोें की कार्यवाही लिखना तथा रिकार्ड रखना ।
3. आय व्यय पर नियंत्रण करना ।
4. वैतनिक कर्मचारियों पर नियंत्रण करना तथा उनके वेतन व यात्रा बिल आदि पास करना।
5. संस्था का प्रतिनिधित्व करना व कानूनी दस्तावेजों पर संस्था की ओर से हस्ताक्षर करना ।
6. पत्र व्यवहार करना ।
7. सम्पति की सुरक्षा हेतु वैधानिक अन्य कानूनी कार्य जो आवश्यक हो करना ।
कोषाध्यक्ष
1. वार्षिक बजट एवं वार्षिक लेखा जोखा तेयार करना एवं कार्यकारिणी के निर्देशानुसार समय समय पर लेखो का अनुमोदन करवाना।
2. दैनिक लेखों पर नियंत्रण रखना ।
3. चन्दा/शुल्क/अनुदान आदि प्राप्त करना तथा रसीद देना।
4. बैंक खातों एवं नकद राशि का प्रबन्धन अध्यक्ष एवं सचिव के निर्देशानुसार करना।
5. अन्य प्रदान कार्य सम्पन्न करना।
अतिरिक्त सचिव
1. सचिव की अनुपस्थिति में सचिव के सभी कार्यो का संचालन करना।
संगठन मंत्री
1. अध्यक्ष/कार्यकारिणी के निर्देशानुसार संगठनात्मक कार्यो का सुचारू रूप से आयोजन करना एवं सदस्यता अभियान चलाना व संगठन को सुदृढ़ करने हेतु अध्यक्ष एवं सचिव का सहयोग करना।

संस्थान का कोष

संस्थान का कोष निम्न प्रकार से संचित होगा -
1. (प) चन्दा (पप) अनुदान (पपप) सदस्यता शुल्क (पअ) चल/अचल सम्पति से अर्जित काय (अ) सहायता (अप) राजकीय अनुदान (अपप) किसी बैंक या वित्तीय संस्था से प्राप्त ऋण। 2. उक्त प्रकार से संचित राशि किसी बैंक में सुरक्षित रखी जायेगी। 3. अध्यक्ष/सचिव/कोषाध्यक्ष में से किन्ही दो पदाधिकारियों के संयुक्त हस्ताक्षरों से बैंक में लेन-देन संभव होगा। परन्तु अध्यक्ष के हस्ताक्षर आवश्यक होगे।

कोष संबंधि विशेषाधाकार

नियम 8 के उपनियम 2, नियम 12 के उपनियम 3 एवं नियम 14 के उपनियम 6 के अनुसार संस्थान के हित में तथा कार्य व समय की आवश्यकतानुसार अध्यक्ष व सचिव स्वीकृत राशि का व्यय कर सकेंगे।

संस्थान का अंकेक्षण

संस्थान के समस्त लेखा जोखा का वार्षिक अंकेक्षण कराया जायेगा व अंकेक्षक की नियुक्ति कार्यकारिणी द्वारा की जायेगी।

संस्थान के विधान में संशोधन

संस्थान के विधान में आवश्यकतानुसार साधारण सभा के सदस्य 2/3 बहुमत से संशोधन किया जा सकेगा जो राजस्थान संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1958 की धारा 12 के अनुरूप होगा।

संस्थान का विघटन आवश्यक हुआ तो

संस्थान की समस्त चल व अचल सम्पति समान उदेश्य वाली संस्था को साधारण सभा के अनुमोदन से हस्तान्तरित की जा सकेगी। लेकिन उक्त समस्त कार्यवाही राजस्थान संस्था रजिस्ट्रकरण अधिनियम 1958 की धारा 13 व 14 के अनुरूप होगी अथवा आयकर अधिनियम 1961 की धारा 12 ।। के तहत पंजीकृत संस्था को होगी।

नोट ः-

संस्थान संबंधित किसी भी मतभेद की स्थिति में इसका न्याय क्षेत्र केवल जोधपुर शहर रहेगा।
प्रमाणित किया जाता है कि उक्त विधान (नियमावली) ’’मारवाड़ जाट महासभा संस्थान’’ जोधपुर की सही व सच्ची प्रति है।।

मारवाड़ जाट महासभा संस्थान

जाट भारत और पाकिस्तान में रहने वाला एक क्षत्रिय समुदाय है। भारत में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात में वसते हैं। पंजाब में यह जट कहलाते हैं तथा शेष प्रदेशों में जाट कहलाते है।

सदस्यता

    निम्न योग्यता रखने वाले समाज के व्यक्ति संस्थान के सदस्य बन सकेंगे।
  • भारत का नागरिक हो।
  • संस्थान के कार्य क्षेत्र में निवास करता हो।
  • बालिग यानी 21 वर्ष की उम्र प्राप्त करली हो।
  • पागल व दिवालिया न हो।
  • संस्थान के हितों को सर्वोपरी समझता हो।
  • किसी भी आपराधिक न्यायालय से दण्डित न हो चुका हो।